Monthly Archives: September 2014

Barren Evening


Barren Evening

 

रात की सियाही कोई, आये तो मिटाये ना
आज ना मिटायी तो ये, कल भी लौट आयेगी
खाली हाथ शाम आयी है, खाली हाथ जायेगी
आज भी ना आया कोई, खाली लौट जायेगी

रात और दिन कितने खूबसूरत दो वक़्त हैं, और कितने खूबसूरत दो लफ्ज़। इन दो लफ़्ज़ों के बीच में, एक वक़फ़ा आता है, जिसे शाम का वक़्त कहते हैं। ये वो वक़्त है, जिसे न रात अपनाती है, न दिन अपने साथ लेकर जाता है। इस छोड़े हुए, या छूटे हुए लावारिस वक़्त से, शायर अक्सर कोई न कोई लम्हा चुन लेता है, और सी लेता है अपने शेरों में। लेकिन कोई-कोई शाम भी ऐसी बाँझ होती है, के कोई लम्हा देकर नहीं जाती।

~ गुलज़ार साहब

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When the Sky Cries


When the Sky Cries

ये गम तो मुझे नसीब हुआ है…

ये आसमां क्यूँ इतना रो रहा है


Randomness…


Randomness

हवाएं कंघी करती हैं
बालों में
कुछ अजीब ही तरीके से
ज़िन्दगी में सब कुछ संजीदा
और सलीके से रखा
अच्छा भी तो नहीं लगता


Moving On…


Moving On

 

 
He – You are like a star to me.
She – Because you see me twinkling?
He – No, because you are quite far away from me.
She – Damn! OK! We both said ‘I Love You’ to each other. Why can’t you move on like me?
He – You just said it, I meant it.

 


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