Monthly Archives: February 2014

वाह तेरा नाम…


waah tera naam

तेरे नाम की बयार चली

मेरे नाम के पत्ते जुड़ गए

तेरे नाम की आंधी चली

मेरे नाम के पत्ते उड़ गए

फिर नसीब न हुई वो छाँव

न फिर हासिल हुई वो ज़मीं

बस मेरे ग़मों के पुलिंदों में

फिर कुछ और जुड़ गए

उस एक छाँव के लिए

सब टहनी, शाखा, डाल छोड़े

सिर्फ एक साथ के लिए

जाने कितने रिश्ते तुड़ गए

कुछ यूँ शराफ़त से निभाया रिश्ता

मिला न सके तुमसे चाल

कि हम वहीँ रह गए जहाँ तुम

हमें छोड़ दूजी राह मुड़ गए

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Reasons…


Silent

 

She preferred to stay silent…

So she wore her shades!


L.O.V.E.


L.O.V.E.

Lake of sorrows

Ocean of tears

Valley of death

End of life

~ Om Dar Ba Dar (1988)


अब…


ab

शरीर कि अंगीठी में
साँसें सुलगती रहती हैं
इंतज़ार करती हैं
कि बरसेगा पानी
पता नहीं कब से
बरसने की आस में
लेकिन शायद
बादलों की फितरत में नहीं
इनपे बरसना
और इनकी किस्मत में नहीं
ठंडा पड़ना
लगता है अब खुद ही
इन्हें पानी देना होगा
बदन की क़ैद में
दम घोंटती इन साँसों को
यूँ ही रिहा करना होगा


एक और आज


कल से इश्क़ था
कल से भी मोहब्बत सी है
आज
बस आज से ही कुछ नफरत सी है
फिर भी
काटता हूँ रोज़ एक आज
इसी मुग़ालते में
कि कल
जब ये आज कल बन जाएगा
तब शायद इस में भी
कुछ इश्क़ करने को मिल जाए


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