Monthly Archives: February 2012

ek saal pehle…aur aaj…


तन्हाई में अक्सर हम, जब खुद से बतियाते हैं
ज़िक्र तेरा जब भी आता है, हम आँखें नम पाते हैं

हर अश्क अपनी ही एक, कहानी कहने लगता है
उन भूली बिसरी यादों को, जब भी दोहराते हैं

वो बारिश की बूंदों से, प्यास बुझाने की कोशिश
आज समंदर किनारे खड़े, खुद को प्यासा पाते हैं

खामोश रातों में तुम्हारी सुनते, सुबह दबे पांव आती थी
अब घडी के कांटे हमको, रात के दो बताते हैं

दिन तारीख़ महीना वक़्त, तब कहाँ याद रख पाते थे
मासूम निगाहों से आज हम, वक़्त को इतराता पाते हैं

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